जीवन के अंत में शिवलोक की प्राप्ति होती है।
तारकासुर वध और कार्तिकेय का जन्म। shivlilamrut in hindi pdf
: Often considered the most powerful, Chapter 11 is frequently recited daily to remove life's problems and mitigate difficult situations. Reading & Parayan (Recitation) Guide shivlilamrut in hindi pdf
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शिवलीलामृत की रचना 17वीं शताब्दी में महान संत श्रीधर स्वामी नाझरेकर द्वारा की गई थी। इस ग्रंथ में कुल 14 अध्याय (अध्याय) और 2453 ओवियां (छंद) हैं। इसमें भगवान शिव के विभिन्न चरित्रों, कथाओं और उनके भक्तों के प्रति उनके अगाध प्रेम का वर्णन है। इस ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य कलियुग में मनुष्यों को पापों से मुक्ति दिलाना और उन्हें भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करना है।
शिवलीलामृत के 14 अध्यायों का संक्षिप्त सार (Summary of 14 Chapters)