एक बार की बात है, एक माँ और उसकी बेटी रहते थे। वे दोनों बहुत प्यार करते थे, लेकिन वे एक दूसरे के साथ खुलकर बात नहीं करते थे। एक दिन, माँ ने बेटी से कहा, "बेटी, मैं तुम्हारे साथ कुछ बात करना चाहती हूँ।"
अंतरवासन
अमृता बचपन से ही सवालों की गठरी लेकर बड़ी हुई। स्कूल के बाद वह साहित्य की पढ़ाई में डूबी रही, किताबों ने उसे असीम संभावनाएँ दिखाईं—वह जानना चाहती थी, देखना चाहती थी, अनुभव करना चाहती थी। पर माँ चाहती थी कि वह घर की जिम्मेदारियाँ संभाले, पारंपरिक राह चुने। दोनों के बीच खामोशी से बँटी हुई हुई नसें थीं—न शब्द, न वाद-विवाद। केवल कभी-कभी की टोकियाँ, चुप विचार, और गीली आंखें। mom with daughter story antarvasna hindi best