दोनों पक्षों ने अपने-अपने धर्मग्रंथों का हवाला दिया, जिससे बहस बहुत गहरी और दार्शनिक हो गई।
डॉ. ज़ाकिर नायक और श्री श्री रवि शंकर के बीच यह बहस इस बात का प्रमाण है कि सत्य तक पहुँचने के रास्ते भले ही अलग हों (कट्टर तर्क बनाम आध्यात्मिक प्रेम), लेकिन दोनों ही पक्ष अपने अनुयायियों के लिए गहरी आस्था रखते हैं। चूंकि मूल वीडियो हटा दिया गया है, इस ऐतिहासिक मुक़ाबले को समझने का यही एकमात्र विश्वसनीय और तथ्यात्मक तरीका है। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
उन्होंने तर्क दिया कि 'न तस्य प्रतिमा अस्ति' (यजुर्वेद 32:3) के अनुसार, ईश्वर की कोई प्रतिमा (मूर्ति) नहीं है, वह निराकार है। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
यह बहस आम तौर पर होने वाले वाद-विवाद से अलग थी, क्योंकि इसमें दोनों पक्षों ने आक्रामक होने के बजाय अपने-अपने धर्मग्रंथों (वेदों, उपनिषदों, गीता और कुरान) के साक्ष्यों के आधार पर ईश्वर की एकता पर जोर दिया। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
डॉ. नाइक ने वेदों के हवाले से मूर्ति पूजा का निषेध किया, जबकि श्री श्री ने कहा कि मूर्ति एक प्रतीकात्मक रूप है जो ईश्वर के प्रति प्रेम विकसित करने में मदद करती है।
बहस का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित था कि आम लोग अपने धर्मग्रंथों को किस तरह समझते हैं।